Thursday, September 10, 2020

Brahmastra ,Ancient India, Ancient Nuclear Wapon

Brahmastra, Ancient India, Ancient Neuclear Wapon

     
        दोस्तों आज हम आपको परमाणु हथियार (Nucler Wapon) के बारे में बताने जा रहे हैं। क्या आपको पता हैं की सर्वप्रथम परमाणु हथियार भारत में बना था? न सिर्फ बना था पर इस्तेमाल हुआ था।

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       हम आप को आधुनिक दुनिया के परमाणु हथियार (Nucler Wapon) के बारे में नहीं प्राचीन भारत (Ancient India ) के प्राचीन (Ancient ) परमाणु हथियार (Nucler Wapon) अर्थात ब्रह्मास्त्र बारे में बताने जा रहे हैं।

क्या हैं ब्रह्मास्त्र ?

" ब्रह्मास्त्र " का अर्थ होता है " ब्रह्मा " का अस्त्र याने ईश्वर का अस्त्र जिसका निर्माण " भगवान ब्रह्मा " ने दैत्यों के नाश हेतु किया था। ... और महाभारत युद्ध में इस परमाणु अस्त्र का प्रयोग भी हुआ था। 

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Lord Bramaha, Brahmastra 

       महभारत केवल महायोद्धाओं की गाथा नहीं हैं। इसमें कई ज्ञान विज्ञान के रहस्य हैं। इनमे से ही एक हैं ब्रह्मास्त्र.... ब्रह्मास्त्र एक दैवीय शस्त्र था जो संभवतः प्राचीन समय का परमाणु हथियार (Nucler Wapon) भी था। 


       ब्रह्मास्त्र अचूक एवं विनाशक था ब्रह्मास्त्र सभी दैवीय शस्त्रों में सबसे शक्तिशाली था। रामायण काल में यहाँ अस्त्र विभीषण एवं लक्ष्मण के पास ही था।

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परन्तु महाभरत में यहाँ अस्त्र द्रोणाचर्य . अर्जुन , युधिष्ठिर , कर्ण , श्री कृष्णा , प्रदुम्न , अस्वथामा ,के पास था। 

कहा जाता हैं की इस अस्त्र को चलाने वाला ही इस अस्त्र को वापस ला सकता हैं।या फिर एक ब्रह्मास्त्र के प्रहार को दूसरे ब्रह्मास्त्र से ही रोका जा सकता हैं।

       प्राचीन काल में इस ब्रम्हास्त्र प्रयोग अस्वथामा ने किय था। परन्तु ब्रम्हास्त्र को वापस लाने का ज्ञान उसे नहीं था। अतः उनका अमरत्व ही उनके लिए शाप बन गया। 

      महाभारत में सौप्तिक पर्व के अध्याय 13 से 15 तक ब्रह्मास्त्र का वर्णन उपलभ्द्ध हैं। उसमे महर्षि वेदव्यासजी ने लिखा हैं की जब ब्रह्मास्त्र का प्रयोग हुआ था तो उसका विस्फोट 1000 सूर्य से भी अधिक चमकदार था। 
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Neuclear Wapon,. Nuclear Explosion


सूरज हवा में घूम रहा था पेड़ों में आग लगी थी। आसपास तबाही के अलावा कुछ नहीं था। विस्फोट के बाद जो इंसान बच गए उनके बाल जड़ने लगे। 

नाखून स्वतः ही उखड के गिरने लगे। महर्षि वेद व्यास ने आगे लिखा हैं की जहा पर ब्रह्मास्त्र का प्रयोग होता हैं वहा 12 वर्षों तक कोई जीव , कोई भी पौधे या जनजाति उत्पन्न नहीं हो सकती।

महाभारत में इस बात का भी उल्लेख हैं की ब्रह्मास्त्र के प्रयोग के उपरांत गर्भवती महिलाओ के बच्चे गर्भ में ही मर गए।

तो जरा अंदाज़ा लगाइए की ये सब वर्णन जो हमारे ग्रंथो में हज़ारो वर्षो पूर्व से ही किया गया हैं वह आधुनिक युग में कहा देखा गया हैं? 

      ब्रह्मास्त्र के प्रयोग के उपरांत जो लक्षण हमारे ग्रंथो में पहले से ही वर्णन किया गया हैं वैसे ही लक्षण जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर 1945 के अगस्त महीने में किये गए परमाणु हमले के बाद आज भी देखे जा सकते हैं। 

ब्रह्मास्त्र के  अस्तित्व के अवशेष :

       जिन देश को हम आज पकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के नाम से जानते हैं प्राचीन युग में इन्हे पांचाल , गांधार , मद्र, कुरु कहा जाता था।

सिंधु नदी यानी आज की Indus river और सरस्वती नदी के बिच सिंधु घाटी की सभ्यता और मोहनजोदारो के शहर थे। 

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     मोहनजोदारो हड़प्पन संस्कृति का हिस्सा हैं। हड़प्पन संस्कृति भारत की सबसे प्राचीन संस्कृति हैं। सन 1922 में R. D. Banerji ने Sir John Marshall की देखरेख में मोहनजोदारो के खंडरो में संशोधन किया। परन्तु भारत पकिस्तान के विभाजन के बाद संशोधन पूर्ण नहीं हो सका। 

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Harappan civilization, Ancient India,  Mohenjo daro 


बाद में Professor David Davenport और उनके साथियो ने इस जगह पर सालो तक खोज की। सन 1977 में कई बातें सामने आयी।

यहाँ उन्हें विक्ट्रीफिकेशन प्रोसेस ( जब पत्थर लावा के साथ पिगल के ठंडा हो के कांच जैसे रूप ले लेता हैं ) किये गए पत्थर के अवशेष मिले जिस पर संशोधन से पता चला की इस प्रक्रिया के लिए 5000 ºC के तपमान की आवश्यकता होती हैं।

 और ये कोई सुपरनेचुरल ताकत से ही हो सकता हैं और ये सुपरनेचुरल ताकत थी ब्रह्मास्त्र।

       सिंधु घाटी सभ्यता की प्राचीन पुरातात्विक स्थल पर परमाणु विस्फोट (Neucler Explosion) के और भी पुख्ता सबूत मिले। 

कई सालो की खुदाई के बाद मोहनजोदारो शहर की गलियों में एक स्थल पर 44 नरकंकाल मिले थे। 

उनमे से कुछ छोटे बच्चो के भी थे। कई वर्षो बाद भी उनकी हाड़ियाँ ना सड़ी  ना ही गली। 

परीक्षण से पता चला के उनमे से कुछ हड़ियाँ रेडियोएक्टिव (Radioactive) थी। यानि परमाणु विस्फोट (Nucler Explosion) का पुख्ता प्रमाण।

         राजस्थान में भी एक जगह पर हाउसिंग सोसायटी का निर्माण हो रहा था वहा रेडियोएक्टिव धूल (Radioactive Dust) मिली थी। अतः हाउसिंग सोसायटी का निर्माण रोक कर DRDO द्वारा रेडियोएक्टिव केंद्र (Radioactive Center) शुरू किया गया।

नुक्लेअर बम के संशोधक J. Robert Oppenheimer गीता , महाभारत , प्राचीन हिन्दू ,एवं वैदिक पाठ के जानकार भी थे। 

उन्हों ने कई बार अपनी interview में ब्रम्हास्त्र से जुडी बात का ज़िक्र किया था।

       हिन्दू प्राचीन वैदिक पाठ में प्रकाशवर्ष की गणना , पृथ्वी से सूर्य क अंतर , आणविक सिद्धांत (Atomic Theory) का उल्लेख हुआ हैं। वैज्ञानिको के अनुसार परमाणु बम्ब बनाने के लिए ये सब जानकारी आवश्यक हैं।

ये सारी बातें इस तरफ इशारा करती हैं की पहला परमाणु हथियार प्राचीन भारत (Ancient india ) की सभ्यता में ही इस्तेमाल किया गया था।


हम आशा करते हैं की आपको यह लेख पसंद आया होगा।



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